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शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

राजीव गांधी उद्यमी मित्र योजना के नाम पर ठगी का धंधा

इन दिनों समुचे झारखंड में राजीव गांधी उद्यमी मित्र योजना धन-बल की राजनीति करने मे माहिर नेताओं विचौलियों के कारणखाऊ-पकाऊयोजना बनकर रह गई है. इस योजना के तहत उद्यम स्थापित करने वालों को प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने, वित्तीय व्यवस्था, तकनीक के चयन, मार्केटिंग और प्लांट एवं मशीनरी की स्थापना में सहयोग देने के नाम पर जिम्मेवार संस्थाएं लोगो से एक मोटी रकम ठग रही है.
ऐसे तो भारत सरकार के लघु और मध्यम उधम मंत्रालय ने झारखंड प्रदेश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने का जिम्मा जमशेदपुर के एन.एस.आई.सी,देवघर के ग्रामीण महिला विकास केन्द्र तथा रांची के अनंत विकास स्रोत सरीखे नामचीन एन.जी.. को सौंपा है लेकिन, आंकलन करने पर साफ़ उजागर होता है कि प्रायः सब कुछ कागजी तौर पर ही हो रहा है और लाभान्वितों को सब्जा-बाग दिखाकर ठगी का व्यापक गोरखधंधा किया जा रहा है.चुकि तीनों संसथाओं को केंद्र में सत्तासीन कांग्रेसी हुक्मरानों का खुला संरक्षण प्राप्त है,अतःएव शिकायत के बाबजूद कोई कार्रवाई नही हो पाती है.
केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्री सुबोधकान्त सहाय सेखाद-पानीपाकर चंद वर्षों में काफी फल-फूल रहे रांची के अनंत विकास स्रोत नामक स्वयं सेवी संस्था ने तो भोले-भाले ग्रामीणों/बेरोजगारों को सरेआम लूटने का कार्य कर रही है.जहां विभिन्न दफ्तरों में नौकरी दिलाने के नाम पर २५-५० हजार रूपये यूं ही ऐंठ रही है,वहीं लघु उद्योग स्थापित करने हेतू बैंको से सस्ते समर्थित दर पर कर्ज मुहैया कराने का प्रलोभन देकर -१० हजार रूपये ले रही है.दूसरी तरफ तो किसी को नौकरी मिल रही है और ही अपेक्षाकृत कर्ज ही.
सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस गोरखधंधे का सबसे अधिक शिकार कांग्रेसी कार्यकर्ता समर्थक ही हुए हैं.राजधानी रांची जिले में ही ऐसे लोगों की तादात हजारों में है,जिनसे मोटी रकम वसूली गयी है.विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह सब केंद्र सरकार प्रायोजित योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने की आड़ में अनंत विकास स्रोत के सचिव राजीव सिन्हा, केंद्रीय मंत्री सुबोधकान्त सहाय के भाई श्री सुनील सहाय एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय,भारत सरकार के कथित टास्क फ़ोर्स सदस्य आर.के.तिवारी इत्यादि काखेलचल रहा है.

रविवार, 27 दिसंबर 2009

आगामी 30 दिसंबर को शपथ लेगे दो उप मुख्यमंत्री के साथ मोहराबादी मैदान मे शपथ झारखंड के नये मुख्यमंत्री शिबू सोरेन

ारखंड के महामहिम राज्यपाल के.शंकरनारायणन ने झामुमो के मुखिया शिबू सोरेन को सरकार बनाने का न्योता दिया है. राजधानी रांची के विशाल मोहराबादी मैदान मे तय कार्यक्रम के अनुसार श्री सोरेन अपने सहयोगी मंत्रियो के साथ दोपहर बाद ठीक दो बजे मुख्यमंत्री के पद गोपणीयता की शपथ लेगे.प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री सोरेन के साथ भाजपा के निर्वाचित विधायक दल के नेता श्री रघुवर दास और आजसू के निर्वाचित विधायक दल के नेता श्री सुदेश महतो दोनो उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेगे. इसके आलावे झामुमो के तीन,भाजपा के तीन,आजसू के दो तथा जदयू के एक मंत्री को भी महामहिम राज्यपाल उनके पढ़ा गोपणीयता की शपथ दिलायेगे.

मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

365दिन चैनल के प्रमुख के अमर्यादित वयान को लेकर पलामू चेम्बर औफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव ने इस्तीफा दिया

गत

13दिसंबर को पलामू चेम्बर औफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के तवाधान मे आयोजित कार्यक्रम "अपने प्रत्याशी को जानिये"कार्यक्रम मे एक निजी चैनल 365दिन के प्रमुख श्री अमल कुमार जैन द्वारा वर्तमान,पूर्व तो दूर भूतपूर्व जनप्रतिनिधियो पर की गई अभद्र टिप्प्णी को लेकर पलामू चेम्बर के सचिव इन्द्रजीत सिन्ह डिम्पल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.उन्होने अपने इस्तीफा पत्र मे लिखा है कि श्री जैन ने समाचार कवरेज के नाम पर जनप्रतिनिधियो के विरूध जिस जिस प्रकार की अमर्यादित टिप्पणी की है,

उससे वे काफी आहत है. उन्होने लिखा है कि श्री जैन को किसी प्रकार की धमकी नही दी गई थी. उनके अमर्यादित शब्दो पर आम लोगो ने सिर्फ बबाल काटा था कि श्री जैन अपने इस्तेमाल शब्दो के लिये माफी मांगे. श्री डिम्पल ने कहा कि चेम्बर ने उस कार्यक्रम का आयोजन अपने प्रत्याशियो के बारे मे जानने के लिये किया था न कि वर्तमान,पूर्व,भूतपूर्व जनप्रतिनिधियो के अपमान करने के लिये.

रविवार, 13 दिसंबर 2009

आदर्श चुनाव आचार सन्हिता का उलंघन कर रहे स्वंय राज्यपाल

इन दिनो समूचे देश मे भ्रष्टाचार के पर्याय बने झारखण्ड प्रांत मे अब आम विधानसभा चुनाव के मतदान प्रक्रिया अंतिम चरण मे है. आगामी 23 दिसंबर की मतगणना के बाद लोकप्रिय सरकार के गठन राज्य मे राष्ट्रपति शासन स्वतः समाप्त हो जायेगी.ऐसे मे झारखंड के महामहिम राज्यपाल के.शंकरनारायनन चार चरण के मतदान के बाद भाजपा-जदयू गंठबन्धन की सरकार बनने की संभावना के मद्देनजर अनेक मह्त्वपूर्ण फैसले ताबड्तोड ले रहे है. इन फैसलो से संबधित बैठको की जानकारी सूचना जन संपर्क विभाग और मीडिया को भी नही दी जा रही है.झारखंड मे चुनाव आदर्श आचार सन्हिता लागू होने के बाबजूद पिछले एक सप्ताह के भीतर ने महामहिम राज्यपाल,उनके सलाहकारो,अधिकारियो ने परामर्शी परिषद की बैठके कर तबादलो का दौर ही जारी नही रखा है अपितु कोर कैपिटल एरिया(नई राजधानी क्षेत्र) के लिये स्थल चयन का अंतिम निर्णय ले लिया है. योजना प्रगति की आड मे राज्य की वार्षिक योजना मद की शेष करीव 8200 करोड रूपये खर्च दिसंबर माह तक कर डालने का फैसला ले लिया गया है.परामर्शी परिषद कई नीतिगत निर्णय योजनाओ को अंजाम देने की बात तो दूर सीओबीटी की भी मंजूरी दी जा रही है.यहाँ अगले साल तक की योजना भी तय हो रहे है. विशेषज्ञ बताते है कि आदर्श चुनाव आचार सन्हिता लागू रहने और लोकप्रिय सरकार गठन होने की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति शासन मे इस तरह के फैसले नही लिय जाने चाहिये.

समूचे देश मे राज्यो का पुनर्गठन एक साथ हो : नीतीश-पासवान


बिहारी राजनीति के मैदान मे एक दूसरे के कट्टर विरोधी बने जयप्रकाश आन्दोलन के दो दोस्त यानि बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू नेता नीतीश कुमार और लोक जनशक्ति पार्टी सुप्रीमो व पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान इस मुद्दे पर एकमत है कि सिर्फ तेलंगाना ही नही बल्कि पूर्वोतर राज्यो को छोड कर सभी बडे राज्यो को ठोस प्रशासनिक आधार देने के लिये पुनर्गठन किया जाना चाहिये.श्री कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल,असम जैसे बडे राज्यो का नये सिरे से पुनर्गठन किया जा सकता है क्योंकि यहाँ के क्षेत्रो की परिस्थितियाँ काफी अलग-अलग है.उन्होने कहा कि जब बिहार का बंटबारा हुआ तो तो एक बडे हिस्से (बिहार) के लोग अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित थे तो एक हिस्से (झारखंड)के लोग काफी उत्साहित थे.लेकिन आज आलम कुछ अलग है. अपने कडे परिश्रम की बदौलत बिहार विकसित राज्य होने की ओर अग्रसर है.
श्री पासवान ने कहा कि वर्ष 2000 मे झारखंड,छतीसगढ और उतराखंड का गठन हुआ. सिर्फ झारखंड को छोड कर सारे राज्य मे बडे पैमाने पर विकास हो रहे है. उन्होने कहा कि झारखंड राज्य को विकसित होने के लिये किसी चीज की कमी नही है. यहाँ कमी है तो सिर्फ कुशल नेताओ की. पिछले एक महीने से राजद सुप्रीमो लालू यादव के साथ अपने गठबन्धन के लिये झारखंड विधानसभा चुनाव प्रचार कर रहे श्री पासवान ने स्पष्ट शब्दो मे कहा कि अलग राज्य गठन के बाद यहाँ के नेताओ मे "कौन कितना भ्रष्ट है" का ही मुकाबला होता रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की चपेट मे आये बिहार के शिक्षा मंत्री

बिहार मे शिक्षको की बहाली संबधी प्रक्रिया के बारे मे सुप्रीम कोर्ट के कडे आदेश के बाद नीतीश सरकार के गले मे पहले से अट्की ह्ड्डी अब और कडी हो गई है,वही उनके शिक्षामंत्री हरिनारयण सिंह अब बुरी तरह फंसते नजर रहे है. देश की सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को यह आदेश दिया है कि वह करीव दो दशक से दर-दर की ठोकरे खा रहे कुल 34540 बेरोजगार प्रशिक्षित शिक्षको को 6 सप्ताह के भीतर नियुक्त कर सुचित करने का आदेश दिया है. कह्ते है कि नीतीश सरकार इस न्यायपूर्ण फैसले को लागु करने के बहाने तलाश कर रही है. सरकार की मंशा है कि इसे किसी किसी प्रकार के पेंच मे फंसा कर टाला जाय.इसके तत्काल दो कारण बताये जा रहे है. पहला तो यह कि नीतीश सरकार के कथित सुशासन काल मे बडे पैमाने पर नियुक्त किये गये बतौर पंचायत-प्रखंड-नगर-जिला स्तरीय शिक्षको की बहाली-प्रक्रिया मे जिस तरह की मनमानी बरती गई है, उससे काफी थू-थू होनी तय है.दूसरा यह कि उनके चहेते शिक्षा मंत्री हरिनारायण सिन्ह बुरी तरह फँसगे क्योकि उन्होने शिक्षको की पूर्व बहाली मे जिस तरह की गोरखधन्धे की है,उसकी सारी कलई खुल कर सामने जायेगी. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के तुरंत बाद ही बिहार कि शिक्षा मंत्री ने कहा कि आदेशानुसार शिक्षको की बहाली करना संभव नही है. उन्होने कहा कि इस मामले मे वे अपने स्तर से सुप्रीम कोर्ट मे शपथ-पत्र दाखिल कर बहाली करने हेतु 6 महीने से उपर की समय-सीमा मांग करेगे.राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि शिक्षा मंत्री ने ये पैतरे अपने काले कारनामे छिपाने के लिये रच रहे है. अगले साल बिहार मे आम विधानसभा चुनाव होने है. ऐसे मे मंत्री चाहते है कि किसी किसी प्रकार से चुनाव आचार सन्हिता लागू होने तक मामले को क्यो टाल दिया जाय. अब देखना है कि लूट-खसोंट मे आकंठ डूबे ये "सुशासन कुमार" ये "बागड बिल्ला" बचते है या फंसते है.ऐसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इनके जितने मधुर संबन्ध बताये जाते है, वे भी चाहेगे कि आने वाले चुनाव तक इस मामले को उभररने से रोका जाय कि विरोधियो की मांग के अनुरूप मंत्रिमंडल के इस निकम्मे मंत्री को हटाकर अपनी छवि के अनुरूप मिसाल कायम की जाय.